Posted on: January 12, 2021 Posted by: lifemap Comments: 0

अपने आपको दोष देना बंद करें

क्या आपने कभी सोचा है, क्या और क्यों आप परिस्थितियों का बार-बार विश्लेषण कर रहे हैं? आप यह क्यों करते हैं? जी हां, हम या आप यह लगातार करते हैं और बार-बार करते हैं। कहने का मतलब है कि ये सच है कि आप ही अपने सर्वश्रेष्ठ आलोचक हैं। आपके दिमाग में वह छोटी-सी आवाज़ जो लगातार चलती रहती है। ये सही है कि कई बार, यह हमें चीजों को गड़बड़ाने से रोकती है लेकिन बहुत बार, यह हम पर और हमारे मूल्यों पर सवाल खड़े करती है। कई विचार जैसे “लोग क्या सोचेंगे?”, “दूसरे क्या कहेंगे?”, “क्या मैं वास्तव में काफी अच्छा या अच्छी हूं?” कहीं से भी आ सकते हैं और वह अंततः हमें उखाड़ फेंकते है और चिंता का कारण बन जाते हैं। अब यहां सवाल उठता है कि इस दुष्चक्र (Vicious Circle) से बचने के लिए क्या करें और कैसे इसे तोड़ें (Break) या इससे बाहर (Overcome or Get rid )आएं?

विचारों की छानबीन करें (Filtretion Of Thoughts)

जब आप विचारों के चक्कर (Spiral) में घिरे होते हैं, तो हम या आप नकारात्मक बातों पर ज्यादा ध्यान केंद्रित करते हैं और जो कुछ अच्छा हो रहा है उसे अनदेखा कर देते हैं। यह ना सिर्फ आपकी चिंता बढ़ाता है बल्कि केवल आपको और अधिक नकारात्मक बनाता है। यह बस आपको नकारात्मकता के एक दुष्चक्र में खींचता चला जाता है और हम इस दलदल में धंसते चले जाते हैं और जीवन के प्रति नाउम्मीद होने लगते हैं। इसलिए सबसे ज़रुरी है कि अपने विचारों की छानबीन करें।

मन की बात को पढ़ना (Mind Reading)

हममें से ज्यादातर लोग ये जानना चाहते हैं कि हर कोई आपके बारे में क्या सोचता है और आप सोचते हैं कि आप जानते हैं कि दूसरे आपके बारे में क्या सोच रहे हैं और यह ज्यादातर नकारात्मक ही होता है। इसलिए दूसरों के मन की बात को पढ़ने में अपना समय व्यर्थ में ना गवाएं, बल्कि इसे सकारात्मक नज़रिए के साथ सही कामों में निवेश (Invest) करें।

भाग्य का पूर्वानुमान लगाना (Fortune Prediction)

लोग सबसे पहले अपने या दूसरों के बारे में भविष्य को लेकर अक्सर नकारात्मक भविष्यवाणी करते हैं और फिर ऐसे कार्य करते हैं जैसे कि उनके भय या डर(Fear) अवश्य ही घटित होंगे। इसलिए ना ही भाग्य का दामन थामकर उसके भरोसे बैंठे और ना ही बेकार के पूर्वानुमान लगाने में अपना वक्त ज़ाया (Waste) करें। परिस्थितियों या फैसलों का आंकलन करें लेकिन अनुमानित जोख़िम (Calculeted Risk) के साथ।

सबकुछ या कुछ नहीं की थ्योरी (All-Or-Nothing Theory)

हम या आप लोगों को सबसे सफल या कुछ भी नहीं के रूप में देखते हैं, जैसे अगर आपने या किसी दूसरे ने एक गलती कर दी, तो सब उसके इलाज या उसे ठीक करने में जुट जाते हैं जैसे कि बाकी सब कुछ गायब और खत्म हो गया है। यहां कहने का मतलब है कि हम जीवन को ब्लैक एंड व्हाइट में ही देखना पसंद करते हैं या उसे स्वीकार करते हैं जबकि जीवन में इन सबके बीच एक ग्रे शेड भी होता है जिसे हम अनदेखा कर देते हैं जो अक्सर सकारात्मक और सही होता है। 

इस नकारात्मक सोच से उबरने के लिए महत्वपूर्ण टिप्स

(Tips to Overcome Negative Thinking Patterns)

हम अपने दिमाग में इस नकारात्मक आवाज़ (Negative Thoughts) को दूर करने के लिए 3P’S फॉर्मूला लागू कर सकते हैं। आइए जानते हैं कि आखिर क्या है 3P’S फॉर्मूला

3P’S फॉर्मूला जिसमें PASSION-PURPOSE-PEOPLE शामिल हैं। सबसे पहले बात करते हैं PASSION की

पहला P है ‘PASSION’ यानि ‘जुनून’ या फिर कह सकते हैं आपका सबसे पसंदीदा काम

PASSION को हम इस तरह परिभाषित या वर्णित कर सकते हैं कि वो काम करो , जिससे आप प्यार करते हो। दरअसल तनाव आपकी सारी सकारात्मक ऊर्जा को अवशोषित (Absorb) कर लेता है यानि सोख लेता है। जितना अधिक तनाव बढ़ता जाता है उतने ही अधिक आप नकारात्मक (Negative) और आलोचनात्मक (Critical) होते जाते हैं। तनाव के इन स्तरों (Levels) को नियंत्रित (Control) करने के लिए, कुछ ऐसा करें जो आपको खुशी दे, जो आपको करना पसंद है। ऐसा कुछ करें जो रचनात्मक (Creative), सकारात्मक (Positive) और आपके लिए मददगार (Heplful) हो। ऐसा कुछ जो आपको अच्छा लगे, जिससे आप प्यार करते हों। इसलिए अपने PASSION को फॉलो करें। 

दूसरा P है PURPOSE यानि उद्देश्य यानि जीवन जीने के लिए एक मकसद

हम सबके जीवन में एक उद्देश्य (Purpose) का होना बहुत ज़रुरी है। इसलिए अगर आपके जीवन का कोई उद्देश्य नहीं है तो उसे निर्धारित (Determined) करें। किसी काम में गलतियां करने के बारे में चिंतित होने के बजाय या फिर कि कोई आपको चाहता नहीं है या पसंद नहीं करता है इसके बजाय अपने लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करें। अपने लिए बड़े लक्ष्य (Goal) निर्धारित करें और इस बात को हमेशा ध्यान में रखें, कि गलतियां हर एक से हो सकती है और छोटी-छोटी गलतियों के बारे सोच-सोचकर अपना वक्त ज़ाया (Waste) ना करें। गलतियां करना कोई बड़ी बात नहीं है। दरअसल यह आपको चिंता से निपटने में मदद करेगा और आपके विचारों को एक नया दृष्टिकोण (Percepective) देगा, जैसे कि अपने भीतर के आलोचकों को सुनने के बजाय आप अपने उद्देश्य पर ध्यान केंद्रित करना शुरू कर देंगे।

तीसरा P है PEOPLE यानि लोग

अपने आप को ऐसे लोगों के आसपास रखें, जिनका आप पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। कहने का मतलब है कि ऐसे लोगों के साथ समय बिताएं, जो आप में सकारात्मकता (Positivity) बढ़ाते हैं। नकारात्मक (Negative) लोग बस आपकी चिंता और आप में नकारात्मक आलोचक ( Critic) को बढ़ाते हैं। इसलिए आपको इससे बचना है, वरना ये व्यवहार आपको औरअधिक तनाव में ला देगा। 

इसलिए अपने अंदर बैठे आलोचक से दूरी बना लें, उसे क्रियाशील ना होने दें और अपने आपमें सकारात्मकता को बढ़ाने के प्रयास करें।

यदि आप मेरे ब्लॉग पसंद करते हैं, तो मुझे बताएं कि आपको क्या परेशान कर रहा है और आप इसके बारे में अधिक क्या जानना चाहते हैं। आप मुझे info@lifemap.in पर संपर्क कर सकते हैं।

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