Posted on: January 12, 2021 Posted by: lifemap Comments: 0

सभी लोगों को खुश करने की आदत छोड़ें और ‘ना’ कहना सीखें

लोगों को खुश करना क्यों ज़रूरी है? हम ऐसा क्यों करते हैं? अगर आप खुद से ये सवाल पूछेंगे, तो आपको खुद जवाब मिल जाएगा, कि हम ऐसा इसलिए करते है ताकि उस जगह या व्यक्ति के दिल में हमारी मौजूदगी दर्ज हो, यानि हम अपने प्रियजनों की गुड बुक्स में शामिल होना चाहते हैं। यहां एक सवाल फिर से आता है कि हम एक साधारण सा ‘ना’ , ‘नहीं’ या ‘NO‘ क्यों नहीं कह सकते। लोगों को खुश करना हमारे लिए इतना महत्वपूर्ण क्यों है।

‘NO’ या ‘ना‘ कहना थोड़ा कठोर या असभ्य लग सकता है लेकिन यह एक बेहद शक्तिशाली शब्द है और इसे स्मार्ट तरीके से इस्तेमाल किया जाना चाहिए। आइए जानते है कि ऐसा क्यों कहा जा रहा है। 

दरअसल हममें से अधिकांश लोग अपने दोस्तों और परिवार या प्रियजनों को ‘ना’ यानि ‘No’ कहने से बचते हैं या उनके आमंत्रण (Invitation) या किसी अन्य अनुरोध (Request or Insisting) को ठुकराना मुश्किल समझते हैं। लगभग ज्यादातर स्थितियों में हमेशा हम उन्हें प्राथमिकता देते हैं यानि उन्हें अपने ऊपर पहले रखते हैं। जबकि कई बार “NO” कहना ना सिर्फ आपकी भलाई के लिए फायदेमंद होता, बल्कि सामने वाले या परिस्थितियों के मुताबिक बेहद ज़रुरी होता है। दरअसल ‘ना’ कहना यानि “NO” …यह स्मार्ट तरीके से उपयोग करने वाला एक शक्तिशाली शब्द है।

हममें से ज्यादातर लोग अपने दोस्तों की योजना या परिवार की हर बात पर आप अक्सर ‘Yes’ यानि ‘हां’ कह देते हैं। यह सिर्फ इसलिए है क्योंकि आप उनकी भावनाओं को आहत नहीं करना चाहते हैं लेकिन, यह अंततः आपको ना सिर्फ निराश, नाराज बल्कि थका देनेवाला हो सकता है यहां तक कि आपको अपने बारे में बेहद नकारात्मक महसूस करा सकता है। यदि ऐसे में अगर आप अपने दिमाग को अनियंत्रित (Uncontrolled) छोड़ दें, तो यह आपके अपने अंदर यानि भीतर ही भीतर नकारात्मक बातचीत में बदल सकता है और परिणामस्वरुप व्यक्ति डिप्रेशन यानि अवसाद का शिकार हो सकता है।  इसलिए ऐसे में ये ध्यान रखना बेहद ज़रुरी है किन्हीं विशेष परिस्थितियों में “नहीं” कहना आपको डिप्रेशन, तनाव, चिंता जैसे नकारात्मक दुष्चक्र (Vicious Circle or Negative thoughts) से बचाने में मदद करता है।

अपना लक्ष्य निर्धारित करने से मतलब केवल उन चीजों को पहचानना और करना ही नहीं है जो आप करना चाहते हैं, बल्कि यहां उन चीजों की पहचान करना भी जरुरी है जो आप नहीं करना चाहते हैं। ‘नहीं’ यानि ‘No’ कहना इसमें बहुत मदद करता है। यह नए अवसरों के लिए रास्ता बनाता है, जैसे कि उन गतिविधियों के लिए समय निकाल पाना, जो आपके लिए जीवन में ज्यादा महत्वपूर्ण और ज़रुरी है और जिन्हें आप जीवन में करना चाहते हैं या पाना चाहते हैं। 

खुद से मजबूत बांड बनता है और दूसरों के साथ सीमाएं निर्धारित करने में मदद मिलती है

(Creates stronger bonds with Youself and Helps to set boundries with Others)

अगर आप उस पार्टी, आमंत्रण या फैमिली आउटिंग के लिए ‘No’ या ‘नहीं’ कहते हैं तो ये इतना अधिक कठोर नहीं लगेगा, जबकि आप अपने आपको पहले रखते हैं बल्कि इससे आपका खुद के साथ एक मजबूत बॉन्ड बनता है। यदि आप हमेशा किसी भी योजना या व्यवस्था को सहमति दे देते हैं, तो इसका एक पक्ष ये भी हो सकता है कि आपके मित्र और परिवार आपके समय और आपकी जरूरतों का सम्मान नहीं करेंगे अथवा आपके जीवन की प्राथमिकताओं को नहीं समझेंगे। कभी-कभी दूसरों को अपने से यानि खुद को पहले प्राथमिकता देने से आपको अपनी सीमाएं निर्धारित करने, उन्हें महसूस करने और खुद की आवश्यकताओं का सम्मान करने में मदद मिलेगी और जिससे आपको अपने आपसे और अधिक मजबूत बॉन्ड बनाने में मदद मिलती है।

प्राथमिकताएं निर्धारित करने में मदद मिलती है

(Helps to set priorities)

 ‘NO’ कहने की आदत वास्तव में आपके कार्यों की प्राथमिकता तय करने में आपको मदद करती है जैसे कि प्राथमिकता के आधार पर आपको क्या करना है और क्या नहीं, क्या यह आपके आधिकारिक या दायित्व वाले काम हैं जैसे नौकरी या व्यवसाय अथवा व्यापार से जुड़ी या फिर पारिवारिक जिम्मेदारी जैसे अपने माता-पिता या परिजन को चेक-अप या अन्य किसी चीज़ के लिए वक्त निकालना वगैरह। एक ‘No’ आपको आपकी आवश्यकताओं के बारे में स्पष्टता प्रदान करेगा और उन्हें पूरा करने के लिए समय देगा। इसलिए हमेशा याद रखें, आप हर किसी को हमेशा खुश नहीं कर सकते हैं, और सबको तो बिल्कुल भी नहीं। इसलिए ‘नहीं’ कहना भी सीखें।

हमेशा ‘हां’ कहना या हमेशा हर बात में अपनी सहमति जता देना हर वक्त, हर जगह या हर परिस्थिति में सही नहीं होता है। ऐसा व्यक्ति होना जो हमेशा ‘हां’ में सिर हिला दे, हमेशा एक अच्छा विचार या सही फैसला नहीं है। ये हो सकता है, कि भले ही आप किसी को ‘ना’ कहने में या उनका प्रस्ताव ठुकरा देने के बारे में कहने पर पहली बार में खुद में अपराध-बोध या खुद को दोषी (Guilt) महसूस कर सकते हैं लेकिन कई बार ज़रुरी होने पर ‘ना’ कहना स्वयं और दूसरों के साथ स्वस्थ सीमाएं बनाने में मदद करता है। किसी भी आदत को बदलने या अपने आपको किसी सांचे में ढालने के लिए समय लग सकता है ऐसा ही कुछ ‘ना’ कहने की आदत को अपनाने में हो सकता है। दरअसल यह मन में एक अभ्यास है, जो आपको शब्द की शक्ति के बारे में अधिक जागरूक बनाता है।

एक “People Pleaser” होना यानि सबको खुश रखना आपके समग्र स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है और यह कहना कि नहीं’ यानि ‘No’ बेहद शक्तिशाली है, यह आपको खुद के लिए खड़े होने के लिए मजबूती और शक्ति प्रदान करता है…

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